Consumer's Equlibrium, Cardinal Approach
उपभोक्ता संतुलन – गणनावाचक विश्लेषण
(Consumer’s
Equlibrium-Cardinal Approach)
एक उपभोक्ता वस्तुओं एवं सेवाओं के उपभोग से प्राप्त होने वाली उपयोगिता को अधिकतम करना चाहता है। अधिकतम उपयोगिता की स्थिति ही संतुलन बिंदु है। अपने इस उद्देश्य को पुरा करने के लिए वह अपनी आय को विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं के उपभोग में व्यय करता है। अतः यह कहा जा सकता है कि उपभोक्ता संतुलन की व्याख्या विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं पर एक उपभोक्ता की आय का अनुकूलतम आवंटन की व्याख्या है।
उपभोक्ता संतुलन की व्याख्या का आधार उपयोगिता की माप के संबंध में अर्थशास्त्रियों के द्वारा दी गई धारणाएँ हैं। उपयोगिता की माप की दो धारणाएँ प्रचलित हैं, पहली गणनावाचक धारणा एवं दुसरी क्रमवाचक धारणा। अतः उपभोक्ता संतुलन की व्याख्या गणनावाचक दृष्टिकोण तथा क्रमवाचक दृष्टिकोण से किया जा सकता है। गणनावाचक विश्लेषण का प्रतिपादन का श्रेय एल्फर्ड मार्शल को जाता है। क्रमवाचक दृष्टिकोण में उपभोक्ता संतुलन की व्याख्या के लिए दो सिद्धांतों का प्रतिपादन किया गया। पहला सिद्धांत जे.आर.हिक्स तथा आर.जी.डी. एलेन के द्वारा दिया उदासीनता वक्र विश्लेषण तथा दुसरा पॉल सैम्यूलशन द्वारा प्रतिपादित प्रकटित अधिमान सिद्धांत (Reaveled Preference Theory)
यहाँ हम उपभोक्ता संतुलन की व्याख्या मार्शलीय सिद्धांत (Marshalian Theory) अर्थात गणनावाचक विश्लेषण से करेंगे।
उपभोक्ता संतुलन का गणनावाचक विश्लेषण
मान्यताएँ-
उपभोक्ता संतुलन का गणनाचक विश्लेषण निम्नलिखित मान्यताओं पर आधारित है।
- उपभोक्ता एक विवेकशील प्राणी है। अर्थात उसे वस्तुओं तथा सेवाओं का चयन तथा खर्च से प्राप्त उपयोगिता का पुर्ण ज्ञान है और वह अपनी आय को वस्तुओं तथा सेवाओं पर खर्च करने से प्राप्त उपयोगिता को अधिकतम करना चाहता है।
- उपयोगिता की माप गिनती की संख्या में संभव है। मार्शल ने मुद्रा को उपयोगिता का मापक पैमाना (Measuring Scale) बताया। यही कारण है कि मुद्रा की सीमांत उपयोगिता स्थिर होने की मान्यता को लिया गया।
- सीमांत उपयोगिता ह्रास नियम का लागू होना। यह नियम स्पष्ट करता है कि वस्तुओं एवं सेवाओं के क्रमिक उपभोग से सीमांत उपयोगिता घटती है।
- उपभोक्ता की आय एवं वस्तुओं की कीमतें स्थिर रहती हैं।
- उपभोक्ता की रुचि, आदत एवं प्राथमिकता में परिवर्तन नहीं होता है।
उपर्युक्त मान्यताओं के होने पर एकल वस्तु तथा एक से अधिक वस्तु की स्थिति में उपभोक्ता संतुलन की व्याख्या की जा सकती है।
एक वस्तु की स्थिति में
मान लेते हैं कि उपभोक्ता अपनी आय को एक ही वस्तु के उपभोग में खर्च करता है। वस्तु की कीमत दी हुई होने पर उपभोक्ता संतुलन की अवस्था में वस्तु की उस इकाई तक उपभोग जारी रखेगा जब वस्तु की जिस इकाई से प्राप्त सीमांत उपयोगिता तथा उस पर खर्च की जाने वाली मुद्रा की उपयोगिता बराबर हो।
वस्तु की किसी इकाई पर खर्च की जाने वाली मुद्रा की उपयोगिता मुद्रा की सीमांत उपयोगिता तथा वस्तु की प्रति इकाई कीमत का गुणनफल होती है। यदि उपभोक्ता वस्तु की किसी इकाई पर Px रु. खर्च करता है तथा मुद्रा की सीमांत उपयोगिता (वस्तु पर एक रुपया खर्च करने पर प्राप्त उपयोगिता) λ हो तो वस्तु की उस इकाई पर खर्च की जाने वाली मुद्रा की उपयोगिता Px.λ होगी यह मानते हुए कि वस्तु की उस इकाई से प्राप्त सीमांत उपयोगिता MUx है, तो संतुलन की शर्त होगी-
MUx = Px.λ
संतुलनावस्था में मुद्रा की सीमांत उपयोगिता वस्तु, की सीमांत उपयोगिता तथा वस्तु की कीमत का अनुपात
है।
यदि मुद्रा की सीमांत उपयोगिता को
एक मान लिया जाए तो एकल वस्तु मॉडल में उपभोक्ता संतुलन की शर्त सीमांत उपयोगिता एवं
वस्तु की कीमत में समानता होगी। संकेत में,
MUx = Px
यदि MUx >
Px , अर्थात वस्तु से प्राप्त सीमांत उपयोगिता वस्तु की कीमत से अधिक है तो ऐसी स्थिति
में उपभोक्ता वस्तु की उपभोग मात्रा में वृद्धि करेगा। ऐसा करने से सीमांत उपयोगिता
ह्रास नियम लागू होने के कारण वस्तु की सीमांत उपयोगिता में कमी होगी तथा उपभोग की
यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी जब सीमांत उपयोगिता वस्तु की कीमत के बराबर न हो जाए।
यदि MUx <
Px , अर्थात वस्तु से प्राप्त सीमांत उपयोगिता वस्तु की कीमत से कम है, ऐसी स्थिति में उपभोक्ता वस्तु की उपभोग मात्रा में कटौती करेगा।
तालिका से स्पष्टीकरण -
माना कि एक उपभोक्ता के द्वारा उपभोग
की जाने वाली कीमत 3रु. प्रति इकाई तथा मुद्रा की सीमांत उपयोगिता 5 इकाई है। वस्तु की कीमत तथा मुद्रा
की सीमांत उपयोगिता स्थिर होते हैं। अतः वस्तु की प्रत्येक इकाई के लिए वस्तु पर मुद्रा
व्यय की उपयागिता स्थिर होगी। वस्तु की विभिन्न इकाईयों से प्राप्त उपयोगिता को निम्न
तालिका में दर्शाया गया है। तालिका से स्पष्ट है कि वस्तु की 6वीं इकाई की सीमांत उपयोगिता, वस्तु की 6वीं इकाई पर मुद्रा व्यय की उपयोगिता बराबर है। अतः एक उपभोक्ता वस्तु की 6 इकाइयों का उपभोग करेगा तथा वह संतुलन में होगा।
वस्तु की इकाई
|
सीमांत उपयोगिता (MU)
|
वस्तु की कीमत (P)
|
मुद्रा की सीमांत उपयोगिता (λ)
|
मुद्रा व्यय की उपयोगिता (P.λ)
|
1
|
40
|
3
|
5
|
15
|
2
|
35
|
3
|
5
|
15
|
3
|
30
|
3
|
5
|
15
|
4
|
25
|
3
|
5
|
15
|
5
|
20
|
3
|
5
|
15
|
6
|
15
|
3
|
5
|
15
|
7
|
10
|
3
|
5
|
15
|
रेखाचित्र से स्पष्टीकरण
रेखाचित्र का विवरण-
X अक्ष (OX) -
वस्तु की मात्रा
Y अक्ष (OY) - वस्तु की सीमांत उपयोगिता तथा मुद्रा
व्यय की उपयोगिता
P.λ मुद्रा व्यय की उपयोगिता रेखा।
MUx - सीमांत उपयोगिता की रेखा।
E - संतुलन बिंदु
संतुलनावस्था में उपभोक्ता वस्तु की oq मात्रा का उपभोग करेगा।
दो वस्तु की स्थिति में (Two Commodity Model)
दो या अधिक वस्तु की
स्थिति में उपभोक्ता संतुलन की व्याख्या के लिए सम-सीमांत उपयोगिता नियम का
प्रतिपादन एल्फर्ड मार्शल के द्वारा किया गया । इस नियम के अनुसार एक उपभोक्ता
अपनी संपूर्ण आय को दो वस्तुओं में व्यय करने के क्रम में संतुलन की अवस्था को
प्राप्त करेगा जब प्रत्येक वस्तु पर व्यय किया गया अंतिम रुपये (एक रुपया) से
प्राप्त संतुष्टि बराबर हो। दुसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि जब प्रत्येक
वस्तु से प्राप्त होने वाली सीमांत उपयोगिता तथा वस्तु की कीमत का अनुपात बराबर हो
तथा दोनों वस्तुओं पर उपभोक्ता की पूरी आय व्यय हो, तभी वह संतुलन में होगा।संकेत में,

जहाँ MUx वस्तु X की सीमांत उपयोगिता, MUy वस्तु Y की सीमांत उपयोगिता ,Px वस्तु X की कीमत, Py वस्तु Y की कीमत M उपभोक्ता की आय , X वस्तु-X की मात्रा ,Y वस्तु-Y की मात्रा तथा λ मुद्रा की सीमांत उपयोगिता है।
यह सिद्धांत दो से अधिक वस्तुओं के लिए भी लागू होता है। मान लिया जाए कि उपभोक्ता दो वस्तुओं का उपभोग करता है जिनकी सीमांत उपयोगिताएँ क्रमशःMU1,MU2, MU3...............MUn तथा उनकी कीमतें क्रमशः P1,P2,P3............Pn हैं। उपभोक्ता संतुलन की शर्त निम्न रूप से लिखी जा सकती है।

तथा

गणितीय व्याख्या
माना कि एक उपभोक्ता अपनी आय M को दो वस्तुओं X तथा Y पर खर्च करता है जिसकी कीमतें क्रमशः Px तथा Py है। वस्तु-X की x मात्रा तथा वस्तु-Y की y मात्रा का उपभोग होता है। उपयोगिता फलन का गणितीय रूप निम्नवत होगा।
U = f(x, y) ……………………...(1)
तथा उसका बजट अवरोध का रूप निम्न होगा।
U = f(x, y) ……………………...(1)
तथा उसका बजट अवरोध का रूप निम्न होगा।
यदि
उपभोक्ता की संपूर्ण आय वस्तुओं पर खर्च हो जाए तो बजट समीकरण का रूप निम्नवत
होगा।
चूंकि
उपभोक्ता का उद्देश्य उपयोगिता को अधिकतम करना होता है अतः यहाँ उद्देश्य फलन (Objective
Function) को निम्न रूप में लिखा जा सकता है।
Max.U = f(x, y) subject to

लैंग्राजे
का गुणक λ का प्रयोग करने पर उद्देश्य फलन होगा
संतुलन के लिए फलन Z का प्रथम कोटि का आंशिक अवकलज (First order partial derivatives) का 0 होना आवश्यक शर्त है। अतः अन्य चरों को स्थिर रखते हुए समीकरण (4) का के सापेक्ष अवकलन करने तथा अवकलज को 0 के बराबर करने पर-
लेकिन हम
जानते हैं कि
f'(x) ,वस्तु X की सीमांत उपयोगिता है। अतः इसे इस प्रकार भी लिखा
जा सकता है।

इसी प्रकार समीकरण (4) को के सापेक्ष अवकलन करने पर हम पाते हैं कि-
पुनः
f'(y) वस्तु-Y की सीमांत सीमांत उपयोगिता है ,
समीकरण (5) तथा समीकरण (6) से हम पाते हैं कि
तालिका से स्पष्टीकरण-
माना कि एक उपभोक्ता अपनी आय Rs17 को दो वस्तुओं X तथा Y में व्यय करना चाहता है। दोनों वस्तुओं की कीमतें क्रमशः Rs2/unit तथा Rs3/unit हैं। दोनों वस्तुओं से प्राप्त हाने वाली सीमांत उपयोगिताओं (MUx,MUy) को निम्न तालिका में दर्शाया गया है। तालिका के चौथे स्तम्भ में वस्तु-X की सीमांत उपयोगिता एवं उसकी कीमत का अनुपात तथा पाँचवे स्तम्भ में वस्तु-Y की सीमांत उपयोगिता एवं उसकी कीमत के अनुपात को दर्शाया गया है।
वस्तु की इकाई
|
वस्तु की सीमांत
उपयोगिता (MUx)
|
वस्तु की सीमांत
उपयोगिता (MUx)
|
MUx/Px
|
MUy/Py
|
1
|
35
|
42
|
17.5
|
14
|
2
|
30
|
36
|
15
|
12
|
3
|
25
|
30
|
12.5
|
10
|
4
|
20
|
24
|
10
|
8
|
5
|
15
|
18
|
7.5
|
6
|
6
|
10
|
12
|
5
|
4
|
7
|
5
|
6
|
2.5
|
2
|
तालिका से स्पष्ट है
कि वस्तु-X की 4वीं इकाई तथा वस्तु-Y की 3री इकाई पर MUx/Px तथा MUy/Py बराबर है। संतुलन का इस अवस्था में उपभोक्ता वस्तु-X की 4इकाई तथा वस्तु-Yकी 3 इकाई का क्रय करेगा। ऐसा करने से उसकी समस्त आय भी
खर्च हो जाएगी। चूंकि 4*2+3*3=17 ।
रेखाचित्र से स्पष्टीकरण-
रेखाचित्र का विवरण-
OO’= वस्तु-X की मात्रा,O’O= वस्तु-Y की मात्रा ,OX= MUx/Px अर्थात वस्तु-X की सीमांत उपयोगिता तथा उसकी कीमत का अनुपात ,O’X’= MUy/Py अर्थात वस्तु-Y की सीमांत उपयोगिता तथा उसकी कीमत का अनुपात। रेखाचित्र से स्पष्ट है कि बिंदु E संतुलन बिंदु है, चूँकि इस बिंदु पर MUx/Px तथा MUy/Py बराबर है। संतुलन की इस अवस्था में वह वस्तु-X की oq मात्रा तथा वस्तु-Y की o'q मात्रा का उपभोग करेगा।
आलोचनाएँ-
- इस सिद्धांत में यह मान्यता है कि मनुष्य को विवेकशील प्राणी है। अर्थात वह विभिन्न वस्तुओं के सीमांत उपयोगिताओं की माप एवं तुलना करने में सक्षम है। लेकिन कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि साधारण उपभोक्ता ऐसा करने में सक्षम नहीं होते। अपनी आय को विभिान्न वस्तुओं पर खर्च करने में उपभोक्ताओं को उनकी आदतें, रीति-रिवाज आदि भी प्रभावित करते हैं जिससे वे अधिकतम उपयोगिता के उद्देश्य पर बिना विचार किए भी खर्च करते हैं।
- उपयोगिता की मापनीयता की मान्यता ही संदेह के घेरे में है। कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि एक उपभोक्ता के लिए यह बता पाना कि एक रसगुल्ला के उपभोग से उसे कितनी उपयोगिता प्राप्त होती है,यह आसान नहीं है।
- मुद्रा की सीमांत उपयोगिता स्थिर होने की मान्यता भी अवास्तविक है। चूँकि जैसे जैसे उपभोक्ता की आय बढ़ती है मुद्रा की सीमांत उपयोगिता घटती है।
Thanks with regard
Purushottam Kumar Pathak
PGT
R.K.+ 2 High School, Ramna











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