उदासीनता वक्र विश्लेषण
उदासीनता वक्र विश्लेषण (Indifference Curve Analyasis) उपभोक्ता व्यवहार के विश्लेषण के लिए उपयोगिता के क्रमवाचक धारणा पर आधारित उदासीनता वक्र विश्लेषण के प्रयोग का श्रेय इंग्लैंड के अर्थशास्त्री जे. आर. हिक्स तथा आर. जी. डी. एलेन को जाता है। उदासीनता वक्र विश्लेषण की खोज एजवर्थ ने 1871 ई. में किया। उदासीनता वक्र विश्लेषण की मान्यताएँ उपभोक्ता एक विवेकशील प्राणी होता है। अर्थात वस्तुओं की कीमतों और अपनी दी हुई आय से एक ऊंचे से ऊंचे उदासीनता वक्र पर पहुंचना चाहता है। उपयोगिता का क्रमवाचक माप संभव है। अर्थात एक उपभोक्ता अपनी पसंद के अनुसार वस्तुओं को एक निश्चित क्रम मे व्यवस्थित कर सकता है। उपभोक्ता का अधिमान एकदिष्ट (Monotonic) होता है। अर्थात वह हमेशा किसी वस्तु की अधिक मात्रा को उसकी कम मात्रा की तुलना को पसंद करता है। दो वस्तुओं की स्थिति में वह उसी बंडल को पसंद करेगा जिसमें कम से कम एक वस्तु की मात्रा अधिक हो...